卐 Shri Mahaviray Namah 卐
卐 Shri Sundarshan Gurave Namah 卐


Lord Mahavira Vegetarian Society (Regd.),Delhi
अहिंसा-लक्षणो धर्मो ह्यधर्मः प्राणिनां वधः। तस्माद् धर्मार्थिभिर् लोकैः कर्तव्या प्राणिनां दया ।। अर्थात्-दया ही धर्म है और प्राणियों का वध अधर्म है, इसलिए धार्मिक पुरुषों को सभी जीवों के प्रति दया ही करनी चाहिए । इस श्लोक के अनुसार यद्यपि ष्जीओ और जीने दोष्,ये मन्त्र भारतीय धर्म और संस्कृति का मूल आधार है, तो भी आजकल हर ओर मांस-अण्डों के सेवन का दुष्प्रचार बढ़ता जा रहा है। खुद भारत सरकार के आंकड़े दर्षाते हैं कि जहां देष में वर्ष 1960 में कुल 14 लाख 29 हजार पशुओं की हत्या हुई, वहां सन् 2015 तक आते-आते यह संख्या 4 करोड़ 5 लाख पशु-वध प्रतिवर्ष तक पहुंच गई। (ध्यान रहे, यह सरकार का अधिकृत आंकड़ा है। इसमें गैर-कानूनी पशु-वध और जल-जन्तुओं का वध शामिल नहीं है।)

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मनुष्य और पषु-पक्षी

सभी प्राणी जीवन से प्रेम करते हैं, सुख चाहते हैं, दुख से डरते हैं, मृत्यु से भागते हैं, जीना चाहते हैं, सभी को अपना जीवन प्रिय है।

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पशु क्रूरता

वर्तमान में, भूतकाल में और भविष्यत्काल में जितने भी तीर्थंकर प्रभु हैं, वे सभी ऐसा कहते थे, कहते हैं और कहते रहेंगे कि किसी भी सूक्ष्म-स्थूल जीव को मारो नहीं, दण्ड आदि से पीटो नहीं, अपने अधीन दासरूप में रखो नहीं और प्राण-हरण मत करो।

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मुर्गी पालन

अण्डे का फण्डा क्या आप अण्डा खा रहे हैं? नहीं, बल्कि असलियत यह है कि अण्डा आपको खा रहा है....

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किशोर कल्याण

Enrich, is an initiation to make available to adolescents a platform to understand and evaluate themselves and seek guidance from the best experts.

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Lord Mahavira Vegetarian Society (Regd.), Delhi
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